Gujari hui umar ko Mt talasho varna kuch gile shikve bhi taja ho jayenge
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कर - कर मेहनत थक गया । रे नर वो यूँही पक गया ।। सरकार ने ली नहीं सुध । और वो धुप में सक गया ।। मेहनत उसकी कितनी है । और...
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गजल हर रोज मरने के बाद । चंद रोज जिया तो क्या ।। हर तरफ से ठुकरा देने के बाद । सबक ए जिंदगी लिया तो क्या ।। राह अपनी वक्त निकल...
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कसूर अक्सर सोचता हूँ क्या कसूर हैं उस गरीब बच्चे का जो पढ़ नहीं पाता क्या कसूर हैं उसका जो वो सड़क किनारे हैं सोता क्या कसूर हैं उसका जो व...

