Saturday, August 26, 2017

रे नर वो किसान है (किसान)


कर - कर मेहनत थक गया ।
रे नर वो यूँही  पक गया ।।

सरकार ने ली नहीं सुध ।
और वो धुप में सक गया ।।

मेहनत उसकी कितनी है ।
और मजदूरी कितनी सी ।।

वो फिर भी कभी डिगा नहीं ।
वो फिर भी कभी मिटा नहीं ।।

रे नर वो किसान है ।
उससे देश का मान है ।।

वो जो नहीं तो बंजर सारा जहाँन है ।
रे नर वो किसान है ।।

वो पालता सबका पेट ,करता ना गुणगान है ।
रे नर वो किसान है, रे नर वो किसान है ।।

वो गर्व है इस देश का ।
वो सर्व है इस देश का ।।

सब सोचों उसका भला , जो पोषित कर रहा सारा जहाँन है ।
रे नर वो किसान है, रे नर वो किसान है ।।

करता निवेदन भारती एक आयोग उसको भी ला दों ।
ओ सरकार चलाने वालों उसका भी ओदा बढ़ा दो ।।

है वो भी पिता तुल्य रे नर ।
क्योंकि वो करता काम महान है ।।

रे नर वो किसान है ।
 रे नर वो किसान है ।।
  
उसके ही दम पे जीवित है हस्तियाँ ।
बिन उसके कैसे टिकती बस्तियाँ ।।

रे मानव वो महान है ।
वो जो किसान है ; वो जो किसान है ।।

लेखक  विरेन्द्र  भारती 
8561887634

गजल एक भारती