Sunday, January 29, 2017

सुन लो मेरे प्यारे बच्चो

सुन लो मेरे  प्यारे  बच्चो
तुम्हें  माँ  भारती  पुकारती ।

उपकार  है  उसके  कहीं  तुम  पर
शायद  इसीलिए  वो ललकारती ।

देख आज के इस इंसान  को
उसका जी घबराता है ।

सोचती है वो भी ये
ये कैसे  भारत के  भाग्य  विधाता  है।

देख अपनी बेटियों  कि  दुर्दशा
वो  तड़प  उठती  है ।

इस  भारत  को  बदलने  का
तुमसे  वो  निवेदन  करती है ।

क्या  कर्तव्य  नहीं  तुम्हारे  कोई
(उस धरा के प्रति ,  अपनी  इस  मां  के प्रति ,
जिसने  तुम्हें  सब  कुछ  दिया । )
सुन लो  मेरे  प्यारे  बच्चो
माँ  भारती पुकारती।

लेखक  विरेन्द्र भारती
        8561887634

गजल एक भारती