Thursday, March 2, 2017

सुन लो मेरे प्यारे बच्चो

सुन लो मेरे प्यारे बच्चो
तुम्हें  माँ  भारती पुकारती
उपकार है उसके कहीं तुम पर
तुमको  है  ये  जानना
सींचा  है  उसने  तुम्हें  अपनी  शीतलता  से
ये  है  तुमको  मानना
मैं  भारती  शीतल  हूँ
  मुझमें  गुलज़ार  सी  धार  नहीं
मगर  मैं  कुछ  तुमको   बतलाता  हूँ
क्या  कर्तव्य  नहीं  तुम्हारे  इस  धरा  के  प्रति
जिसमें  तुमने  जन्म  लिया
तुम्हें  पता  है  न  जाने  कितने  महापुरुषों  ने  मिलकर  इसका   गौरव  बढ़ाया  है
फिर  तुम  क्यों  करते  हो  वो  कुकर्म   जिसे  देख  इसका  जी  घबराया  है ।
बहन  बेटियों  से  हो  रहा  दुराचार   क्या  तुम्हें  दिखता  नहीं।
अब  तो  उठो  मेरे  भारत  के  विरेन्द्रों  ।
क्या  तुम्हें  कुछ  अच्छा  जचता  नहीं ।।

गजल एक भारती