Monday, April 24, 2017

ख्वाब

आज रात फिर मैंने तुम्हारा ख्वाब देखा शीतल
मैनें ख्वाब मैं देखा
तुम मुझसे मिलने आयीं थीं,
बडी मन्नतों के बाद
शायद आखरी दफा
ये कहने की मैं अब फिर नहीं लौटुंगी
तुम्हारी होने के लिए
तुम मुझसे अकेले मैं बात करना चाहती थी।
हम वहाँ से एक सांत स्थान पर गए।
मै बहुत रो रहा था।
तुम भी बहुत दुःखी थी और घबराई हुई थी ।
मै सिर्फ तुम्हारे चेहरे को देख रहा था,
और तुमसे कह रहा था
तुम जा रही हो
मुझे फोन तो करोगी ना
कम से कम चार दफा
एक माह में
तुमने हाँ नही कहा
लेकिन 
ना भी तो नही कहा
मै रो रहा था 
तुम सामने खडी थी
मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था
मैं तुम्हें जाने नहीं देना चाहता था
क्योंकी
मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता था
तुम भी दुखी थी
मैं भी दुखी था
अचानक नींद खुल आई
सपने के बारे मै सोचकर
बहुत दुःखी हुआ
कई बार चाहा तुझे फोन करना
लेकिन मै तुझे परेशानी मै नही डालना चाहता था
क्योंकी मेरा फोन देखकर शायद तुम परेशान हो जाती।
तुम्हारी बहुत याद आती है शीतल
लौट आओ ना
तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा भारती

गजल एक भारती