Thursday, February 16, 2017

तबाही

ओ हमनशी,
तबाही मिली है उम्र भर के लिए,
तेरी मोहब्बत मैं ।
मगर जो पल तेरे साथ बिता आया हूँ।
लगता है, उनमें  कई  सदियाँ  जी  आया हूँ।
मेरी धड़कने  तेरे जाने से  रूक  सी गई , 
मेरी कस्तियाँ तेरे जाने से डूब सी गई ।
जो भूचाल  आया  मेरे  दिलों  दिमाग में , 
मेरे  सुख के  संसार  मेें ।
कौन थामेगा  उसको,
कौन  संभालेगा  मुझको।
हम जिस्म  दो,
 जान एक थे।
लगता था ऐसे , 
साथी अनेक थे।
कौन रोकेगा  मेरे  डूबते  हुए  सुरज  को,
कौन संभालेगा मेरी  शान  ओ  शोहरत को।
बहुत दुर चला हूँ  तेरे संग , 
तेरे बिन  तेरे  ख़्वाबों  में ।
मैंने  तोड़  डाला  अपना  हर  ख्वाब , 
तेरी  खुशी के  लिए ।
देखना है,
तुम ख्याल  कितना  रखती  है,
मेरी खुशी का ।
मेरा  एक  सवाल  जो  तुझसे हैं ,
क्या  तु  फिर  नहीं  आ  सकती  उम्र  भर के लिए ?
मेरी   होने  के  लिए ।

Deewana writer virendra bharti 
8561887634
Missing SHEETAL RAJAWAT 

गजल एक भारती