Wednesday, November 2, 2016

मेरी उपलब्धि विरेन्द्र भारती

हर वक्त का हिसाब रखता हूँ,
उसकी जुदाई की किताब रखता हूँ।
जब भी सोचता हूँ; मै अपनी उपलब्धि के बारे मैं,
तो मैं खुद को बर्बाद दिखता हूँ ।।
Mad writer virendra bharti 
8561887634

गजल एक भारती